अच्छे संस्कार के मायने क्या हैं

कुछ दिनों से morning walk के लिए जाना फिर से शुरू कर दिए हैं। ऐसे तो जबसे diabetes का पता लगा निरंतर छत पर शाम को टहलने के लिए जाते रहे हैं। लगभग एक साल हो गया। लेकिन पिछले दो महीनों से सुबह नींद जल्दी खुलने लगी और लगभग 5 बजे टहलने के लिए निकल जाते थे। मन में इतना कुछ भरा रहता था कि छत पर चक्कर लगाने से ज्यादा दिमाग में कुछ चलता रहता था। बार बार अपने आप को रोकने की कोशिश करते और बार बार दिमाग उन्ही बातों में उलझता जाता। अंत में हार कर छत पर जाना ही छोड़ दिए। लगता था सुबह सुबह ऐसी नकारात्मक बातों से दिन की शुरुआत करने से अच्छा है घर में बिस्तर पर ही एक घंटा बिता दिया जाय।

अचानक एक दिन प्रिया मिलने आ गयी।हमउम्र तो नहीं है, काफी छोटी है मुझसे लेकिन उसको मेरा और मुझे उसका साथ अच्छा लगता है। aunti बुलाती है मुझे और कहती है आप सभी उम्र के लोगों के साथ mix कर जाती हैं। हम साथ साथ पार्क में जाने लगे। उसकी सुविधा को देखते हुए हम सुबह 6 बजे निकलते हैं और लौटते लौटते 7.15 तो हो ही जाता है। वहां औरतों का एक group टहलने के बाद प्राणायाम कर रहा होता था। हम भी उन्ही के पास बैठकर प्राणायाम करने लगे। साथ ही उनकी बातों पर भी ध्यान जाने लगा। बातें वो आपस में ही कर रही होती थीं लेकिन मेरा ध्यान भी बरबस ही उस ओर खिंच जाता। जवाब तो हम कुछ नहीं देते पर लगता कि कितनी अच्छी बातें करती है।

एक दिन तो वो हमसे बोलीं भी कि हम इतना कुछ बोल जाते हैं आप कुछ नहीं बोलतीं। और हम फिर कुछ नहीं कहते हुए मुस्कुरा भर दिए। आज उनकी एक बात बहुत अन्दर तक चीरती हुई चली गयी। बच्चों की परवरिश पर बात हो रही थी। किसी के बारे में बता रही थीं कि कैसे उन्होंने अपने बच्चों पर ध्यान नहीं दिया और आज बेटा बेटी बहू सब से परेशान हैं। साथ ही ये भी दावा कर रही थीं कि हम तो अपने बच्चों पर पूरा ध्यान देते हैं संस्कार भी अच्छे दिए हैं। आज हमको तरस आता है ऐसी सोच रखने वालों पर।

किसके बच्चे क्या बनेंगे बड़े होकर कौन जानता है?एक समय था जब लोग मेरा और मेरे बच्चों का उदाहरण दिया करते थे कि देखो ऐसे होते हैं बच्चे और ऐसे पाला जाता है बच्चों को।आज क्या दिखाई दे रहा है? लोग कहते हैं अपने ही किये कर्म सामने आते हैं ।क्या इतने बुरे कर्म हम करके बैठे हैं?

 

0 Comments

Leave a reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

*

CONTACT US

We're not around right now. But you can send us an email and we'll get back to you, asap.

Sending

©2017 Kuch Teri Kuch Meri. All rights reserved.

or

Log in with your credentials

Forgot your details?