मन तो एक यायावर सैलानी है

इनके किसी मित्र की पत्नी के बारे में सुना। कुछ महीनों के लिए वो अपने पति बच्चों को छोड़कर चली गयी थी।

जब चर्चा हो रही थी मै जोरदार शब्दों में दलील दे रही थी की उसके लौटने पर पति ने अपना कैसे लिया?नहीं अपनाना था।

मन भी अजीब है ।बुद्धि और विवेक से दूर।कब क्या चाहे क्या पता।

रेखा क्यों और किस चीज़ की चाह में पति को छोड़ गयी। प्यार,और शायद भक्ति के स्तर तक चाहने वाला पति। पैसे की कमी नहीं ,बच्चे भी ,सुन्दरता की सराहना करने वाले और दिलजोई करने वालों की कमी नहीं। फिर और क्या चाहिए था। निश्चित ही निर्मल ने उसे शक की निगाहों से नहीं देखा होगा। रेखा की सुन्दरता पर उसे भी उतना ही गर्व रहा होगा तभी तो घर में एक अवांछित पुरुष का प्रवेश हुआ होगा। आखिर मन क्यों विचलित हुआ?

एक ही तरह के पकवान खाते खाते मन ऊब जाता है चाहे कितना भी अच्छा कितना भी स्वादिष्ट क्यों न हो?वैसे ही क्या जिंदगी में भी। प्रायः पति पत्नी जो साथ जिंदगी बिता लेते हैं क्या इसलिए की options नहीं होते या निर्मल के तरह का उदार पार्टनर नहीं,की लौटने पर अपना ही लेगा।

पराये पुरुष या स्त्री में एक अनोखा आकर्षण हुआ करता है। एक धुंध में लिपटा हुआ व्यक्तित्व। जो दिखता है वो अच्छाई ही होती है। बुराई न तो दिखती है न देखने की कोशिश ही होती है। एक एडवेंचर की चाह में  आगे बढ़ता जाता है।आदमी स्वाभाव से ही colombus होता है न। नयेपन की खोज। इसको जीतना है इसे दास बनाना है ।देखें अपनी क्षमता का पुनर परिक्षण कर के। एक अदद तो है ही पड़ा जेब में।

बाद में जब रेखा का सारा पैसा ख़त्म हो गया होगा ,साथ रहते रहते प्रेमी के भी कमियों पर नजर पड़ी होगी। या उसके प्रेम की पुलाव बिरयानी खाकर अपच हो गया होगा तो किसी पल पति बच्चों की याद आई होगी

आखिर colombus को भी तो लौट कर घर आना होता है।

क्या रेखा को अपनी सूरत दिखाते शर्म आई होगी ?या इतना समय बिताकर ढीठ हो गयी होगी — फिर भाग जायेंगे। या पति जो इतनी व्याकुलता से उसे तलाश रहा है जानकर खुश खुश घर लौट आई होगी?

निर्मल ने क्या उसे कभी उलाहना दिया या शक जाहिर करता है?

ऐसा कुछ नहीं हुआ होगा ।

रेखा घर आकर अपने पुराने दिनचर्या में इस तरह घुलमिल गई कि देखने वालों को भी शक होता की ये कभी कहीं गयी भी थी। और निर्मल वो तो और विनीत और दास हो गया । इतना मधुर इतना प्रेमी की…………।

इसके बाद का जीवन वैसे ही बीता जैसा बीतना चाहिए था।

नोट:आप अपने प्रिय पात्र को त्याग नहीं सकते।,चाहे उसने कित्निभी गलती की हो।ये मानवीय स्वाभाव है। जो त्यागते हैं वो मन से नहीं सिर्फ चक्षु लज्जा से की लोग क्या कहेंगे।

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