साधारण स्वतंत्रता के आभाव में चतुरता- नारी का चलित्तर

साधारण स्वतंत्रता के आभाव में चतुरता की ऐसी मज़बूरी ही नारी का चलित्तर कहलाती है।
-यशपाल (झूठा सच)

मैत्रयी पुष्पा का त्रिया हट्ठ पढ़े।अच्छी लगी। लकिन कहानी से पहले लेखिका ने जो दो शब्द लिखे हैं वो बहुत पसंद आया।
एकदम मेरे मन की बातें–

हम अपने औरत्पने के चलते-अपनी निजी अनुभूतियों को कभी व्यक्त नहीं करना चाहते हैं।

अपनी छवि के प्रति इतने conscious रहते हैं की कहानी के पात्र को भी आदर्शवादी ही दिखाना चाहते हैं। ऐसा न हो की -पात्र के विषय में लिखी ओछी मनोवृत्तियाँ -मेरी अपनी मनोवृत्ति ही समझ ली जाएँ। विशेषकर यौन्सुचिता को लेकर।

औरत -माँ ,पत्नी,बहन के मर्यादापूर्ण स्थान पर रहने के बावजूद मानव ही है,तमाम मानवीय कमजोरियों के साथ इस बात को प्रकट नहीं करना चाहते हैं कभी भी।
लेखिका से मिल पाते—।

 

 

 

0 Comments

Leave a reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

*

CONTACT US

We're not around right now. But you can send us an email and we'll get back to you, asap.

Sending

©2017 Kuch Teri Kuch Meri. All rights reserved.

or

Log in with your credentials

Forgot your details?