आइये घर के साथ मन भी स्वच्छ करें

एक बार ब्रह्मकुमारी सिस्टर शिवानी को सामने से सुनने का मौक़ा मिला ।ऐसे तो tv पर उनकी बातें हमेशा अच्छी लगती थीं पर सामने से बात ही कुछ और थी।उस दिन जो उन्होंने कहा उन में से एक बात का मैं यहाँ ज़िक्र करना चाहूँगी।
 
आपके घर कुछ मेहमान आए हैं।आप सबके साथ बैठकर चाय नाश्ते का आनन्द ले रही हैं ।तभी किसी के हाथ से चाय छलक के सोफ़े पर गिर जाती है।आप कहती हैं कोई बात नहीं और तुरंत उठकर भीगे कपड़े से सोफ़े को साफ़ कर देती हैं।जबकि हमें जब कोई बुरा भला कह जाता है ,दिल को चोट पहुँचाता है तो हम उसे दिल से लगा के बैठ जाते हैं।
 
इस तरह तो हम अपने को ही नुक़सान पहुँचाते हैं और उस घटना को बार बार याद करके दुखी होते रहते हैं।जबकि होना ये चाहिए था कि सोफ़े की तरह उस बात को भी हम तुरंत अपने मन से साफ़ करके निकाल देते।
 
बहुत लोग तो बड़े गर्व के साथ कहते हैं ‘उसने मुझसे ऐसा कहा मैं कभी नहीं भूलूँगा ‘।एक सोफ़े का तो आपको इतना ख़याल है और आपका मन ? उसपर जो मैल जमता जा रहा है ?आइए आज उस मन की सफ़ाई करें और जिसने भी हमें जाने अनजाने दुःख पहुँचाया हो उसे दिल से माफ़ करें ।
 
साथ ही अपनी शुभ भावनाएँ भी उसे पहुँचाएँ ।

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