महाभारत – उलजलूल रिश्तों का तानाबाना

वंश परंपरा एवं वारिस की कैसी हास्यास्पद श्रंखला है महाभारत में।

शांतनु का भरत वंश- उसके भीष्म और चित्रांगद,विचित्रवीर्य तीन पुत्र हुए। वंश परंपरा तो इन्ही तीनों से बढ़ सकती थी। किन्तु भीष्म रहे अविवाहित,और चित्रांगद मारा गया युद्ध में।

विचित्रवीर्य की दो पत्निया-अम्बा और अम्बालिका ।किन्तु संतान होने से पूर्व हि
विचित्रविर्य की मृत्यु हो गई।

अब शांतनु की पत्नी सत्यवती की विवाह पुर्व हुई संतान व्यास मुनि से अम्बा,अम्बालिका को पुत्र प्राप्ति।
तो ध्रितराष्ट्र और पांडू में कहीं से भी भरतवंश का खून दौड़ने की सम्भावना है। कतई नहीं,फिर भी वे भारतवंशी ही कहलाये। क्या विडम्बना है?

पूरा महाभारत ही ऐसे उलजलूल रिश्तों से भरा है।
आगे चलकर तो और मजेदार। फिर पांडू अपनी संतान उत्त्पत्ति में अक्षम,तो कुंती और माद्री ने तथाकथित देवताओं से संपर्क किया एवं पाँचों पांडवों का जन्म हुआ।

और देखिये—ये भी भरतवंशी ही कहलाये।

इतना गोलमाल —शायद ही किसी परिवार में रहा हो।
और हम अब भी टी वी सीरियल को दोष देते हैं की बहुत बेतुकी कहानियां होती हैं —।

 

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