एक हजारों में मेरी बहना है

फूलो का तारों का सबका कहना है,
एक हजारों में मेरी बहना है।
सारी उमर हमें संग रहना है।

जब बचपन में ये खेल खेल में हम गाते तो लगता कि सच ही हम सारी उम्र संग ही रहेंगे। ये प्यार बस गाने तक ही था फिर थोड़ी ही देर में लड़ भी लेते…. भईया कुछ कहता और मैं चिढ़ जाती…”मम्मी, भईया चिढा रहा है….”

और कभी ये लड़ाई थोड़ी आगे जाती तो हम दोनों की एक फ़ोटो जो साथ में थी और जिसकी अनगिनत कॉपी थी, आधी आधी कर दी जाती। अब मैं भईया के साथ नहीं रह सकती। फ़ोटो तक में नहीं। अब केवल एक ही कॉपी बची रह गयी है |

कॉपी से दो पन्ने फाड़ती…..तब स्कूल में नया नया पत्र लिखना सीखा था।

आदरणीय मामा जी / मौसी
चरण स्पर्श

हम सब ठीक है और आशा करतें है कि आप सब भी अच्छे होगें।

भईया मुझे बहुत तंग करता है। अब मैं उसके साथ नहीं रह सकती। मुझे आ कर ले जाइये।

आपकी प्यारी भांजी
……

और माँ के पास चिठ्ठी के दोष सही कराने पहुँच जाती। “और ये पापा से पोस्ट करवा दीजिएगा।”

तब माँ हँस के कहती “अब तो मामा और मौसी दोनों को बेटी है, अब वो तुम्हें क्यों प्यार करेगें। और ऐसे ही चिठ्ठीयाँ कभी पोस्ट ना होती।

झगड़ा भी दूसरे पहर तक छु मंतर हो जाता।

शाम में अगर कॉलोनी में खलने जाते तो मेरा दूध-भात रहता। दूध-भात…जिसमें पकड़े जाने पर भी चोर नहीं बनते। बाद में नियमों में फेर बदल किया गया और नए नियम के अनुसार यदि मैं पकड़ी गई तो चोर भईया बनता।

LKG में तो मैं इतना रोती कि शायद सारा साल भईया मेरी ही क्लास में बैठा दिया गया था। अगर कभी स्कूल में मेरे पास पेन या पेंसिल ना होता तो भईया के क्लास चली जाती… वो तुरंत मुझे अपनी दे देता; फिर चाहे उसे खुद किसी से मांगनी ही क्यों ना पड़े।

यदि कभी दो टीचर्स की बात में भेद हो तो जो भईया बताता मैं उसपर ही विश्वास करती।

एक बार चाचा जी की शादी के लिए हमें पटना जाना था। मेरे बाल लंबे होगए थे और शादी के घर में माँ को मेरे बाल सँवारने का वक़्त न मिल पाता तो माँ हमें नाई के यहाँ जाना है ये कह कर सोने चली गई।

भईया ने कहा कि वो मेरे बाल काट सकता है, नाई के यहाँ जाने की कोई आवश्यकता नहीं। हमलोग कुर्सी, पानी, कैची, कंघी …. लेकर छत पर चले गये। थोड़ा इधर…थोड़ा उधर… थोड़ा आगे तो थोड़ा पीछे…

माँ उठी तो ये सरप्राइज़ उन्हें बिलकुल अछा ना लगा। फिर नाई के पास जाना पड़ा। “अंकल बाल ठीक कर दीजिये। शादी में जाना है।”

नाई को भी भईया के इस हुनर से ईर्ष्या हुई तो उसने कहा कि पुरे बाल छिलने होगें, कोई विकल्प नहीं। तब बालो से इतना प्यार नहीं था जितने अब हैं | शायद अब ऐसी स्थिति आने पे मार-कुटाई कि नौबत आ जाती |

शादी में मेरा बाल एक महत्वपूर्ण विषय था। सबको एक एक कर सुनाती और सब बार बार पूछते और हँसते ….कंजूस भईया की कंजूस बहन।

और भी कितना कुछ …. शेष फिर कभी |

जब भी मैं और भईया मिलते हैं तो ऐसी कई किस्सों पर हँसते हँसते  पेट पकड़ लेते हैं।

 

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