One day out- Agra and Fatehpur Sikri

 सोच तो बहुत दिनों से रहे थे, लेकिन जाना न हो पाया था…. लेकिन,इस बार आखिर plan बन ही गया आगरा जाने का….

शताब्दी में tickets लिए गए, और हम तैयार…

रात को ही खबर मिली auto वालों की strike है…अब…खैर,कोई बात नहीं, cab book करवा लेंगे…

सुबह 6 बजे की train थी तो 4.30का alarm लगाकर सो रहे…लो,ये क्या…ऐन मौके पे cancel कर दी booking cab वाले ने…

दौड़ते भागते main road पर पहुंचे,लेकिन कोई सवारी नहीं, धड़कन तेज़ हो रही थी, train छूट तो न जायेगी..

फिर बस आती नज़र आई…लपक लिए उस ओर… यानि की adventure की शुरुआत हो चुकी थी….

आगरा ठीक 8 बजे पहुँच गए,वहां से सीधे ताजमहल….रास्ते में cab driver ने कहा….बड़े ठग होते हैं यहाँ,संभलकर… बेटे ने हंसकर कहा…ये तो हर जगह की बात हो गई है…जी हां…लेकिन यहाँ तो डकैत हैं,चोर नहीं….चलो देखते हैं…

ताज़ वाकई ताज़ ही है…
अनुपम,अद्वितीय…

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इतनी बार मन की आँखों से देख चुके थे,पहली बार देखने जैसा एहसास नहीं हुआ,लगा जैसे पहले भी आ चुके हों…(पिछले जन्म में तो नही)….

बादल घिरने लगे थे,दिन ठंडा हो चला था…सफ़ेद संगेमरमर पर पैर रखना सुखद लग रहा था…

बहुत सारे ,आजकल के, बड़े ढांचों की सोचें तो ये अजूबा नहीं लगता…लेकिन जिस वक़्त की ये इमारत है,सिमित संसाधन के हिसाब से…वाकई अजूबा ही है…शांत सौम्य अद्भुत….
10.45 हो गया था,दो घंटे से ज्यादा…

समय कैसे बीत गया,कुछ याद नहीं…

यहाँ से पुरानी किला देखने जाना है…
E rikshaw चलते हैं…ताज़ महल और पुरानी किला के बीच…30 रु में दो लोगों को ले जाने को तैयार हो गया…

हल्की बूंदाबांदी शुरू हो चुकी थी…पर किसे परवाह थी…

रास्ते में चालक ने बताया….यहाँ बहुत ठग मिलेंगे…ओह….

समय काफ़ी था हाथ में..लगे हाथ फतेहपुर सीकरी भी चलें क्या?

E rikshaw वाले ने पूरा ब्यौरा समझा कर बता दिया…संभावित rates, और उपलब्ध साधन भी…

पुराना किला बहुत खूबसूरत था,यद्यपि रखरखाव उतना ढंग का नही था…
शायद ताज़ की छाया में,किला दब सा गया है….

Auto पर बैठे ,और जोर की बारिश शुरू हो गयी….पुराना किला से ईदगाह की ओर…

ईदगाह बसअड्डे पर फतेहपुर सीकरी जाने वाली कोई बस नहीं थी,क्या किया जाये?
यूँ ही खड़े एक व्यक्ति ने कहा…जयपुर वाली बस लेकर बाईपास पर उतर जाना,वहां से auto फतेहपुर तक के लिए मिल जायेगी….

हमदोनों ने आपस में विचार किया…रुकने से बेहतर है….बढ़ते जाना….
बस genral थी,पूरी भीड़ और लोकल flavour लिए…

लेकिन seat मिल गयी,और हम दुबक लिए….
Bypaas से ऑटो मिल गई,आसानी से…

फतेहपुर सीकरी काफी बड़े क्षेत्र में फैला हुआ,विस्तृत ढंग से बना हुआ किला है…और….सलीम चिश्ती का दरगाह…

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हरियाली और लाल पत्थर का contrast देखने लायक…

वैसे तो पूरे आगरा में ही guides की भरमार है,चाहे ताज़ हो,पुराना किला हो या फतेहपुर….लेकिन यहाँ तो छोटे छोटे बच्चे भी…मैडम शायरी सुना दूँ…सिर्फ 10 रु …इतने सारे बच्चे थे…हालाँकि अभी भी मैं सोचती हूँ वो क्या सुनाते…दरगाह के गलियारे में …traditional handicrafts… lip reading की कला तो होती है,ये पता था,लेकिन eye reading भी होती है….भूल से भी नज़र किसी चीज़ पर 2 second के लिए भी टिक गई तो ख़ैर नहीं…यूँ लपक के घेर लेते हैं…उफ़…

थकान हो रही थी अब…4.45 हो चला था….
मौसम बेहद सुहावन…

बस स्टैंड पर कोई बस नहीं थी,तो चले bypass की ओर….
और ये लो….झमाझम बारिश…

क्या करें,इंतज़ार किया जाये किसी बेहतर सवारी का….
Jeep ….
याद नहीं कब last jeep की सवारी की थी….
चलो ,ये experience भी कर ही लें…

बाहर बारिश और अंदर….घूँघट वाली,पगड़ी वाले….
Journey कुछ ज्यादा ही adventurous होती जा रही थी…

जाते वक़्त तो रास्ते ऐसे न थे,….
पूरा रास्ता जलमग्न…लाल लाल कीचड़ पानी….

आखिरकार आगरा पहुंचे….

बारिश में ही उतरना पड़ा…जीप चालक ने rikshaw ठीक किया और हमें बिठाया….
समय 6.30….भूख भी लग गई थी और बाज़ार भी देखना था…

पेठे और दालमोट लिए बिना तो आगरा का सफर अधूरा ही रह जाता…
मशहूर पंछी पेठे वाले तक रिक्शे वाले ने आसानी से पहुंचा दिया….सदर बाजार में…
समय 7.45

9.00 बजे की ट्रेन…वापसी की…Waiting room में ही बैठते हैं…

Train में बैठते ही dinner serve कर दिया गया…

कब आँख लग गई,कुछ याद नहीं…
Delhi पहुँच गए…बेटे ने जगाया….!!!

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