रिश्ते- मीठा और मिलावट रहित, नारियल पानी सा

“वो मेरे लिए नहीं रो रही, वो तो इस लिए रो रही थी की उनकी Social Respect कम हो जायेगी मेरे fail होने से”

हर रोज की तरह मैं स्कूल के बाद ट्यूशन के लिए निकली तो बबली को उसके घर से लेने चली गई। आंटी की आवाज गेट पे ही सुनाई दी तो खटका हुआ कि पता नहीं आज किस पे गुस्सा हो रही हैं। बबली की छोटी बहन मुझे अंदर ले आई। आंटी रो रही थी और बोल रही थी “fail है…..क्या होगा कैसे करेगी…घर में रिजल्ट बताई भी नहीं” तो लगा अनजाने ही ये सारा हंगामा तो मैंने ही करवा दिया। छुट्टी के समय बबली की बहन स्कूल गेट पे मिल गई तो छणिक बातचीत में मैंने ही बता दिया था की सारे ही पेपर क्लास में दिखा दिए गए हैं।

अब मुझे ये तो पता न था की बबली ने नहीं बताया घर पे वरना मैं भी ना कहती। चलो अब कुछ किया तो जा नहीं सकता। “रे बेलचा रे….बुलाओ उसको…” आंटी की आवाज से तन्द्रा भंग हुयी।

बेलचा! ये बबली का ही नाम था मुझे भी तब ही पता चला।

खैर जो सुनना था सुन सुना के और आंटी को सांत्वना देकर कि बबली कर लेगी आंटी आज जाने दीजिये, हम दोनों ट्यूशन के लिए निकले। मैं तो यह भी सोच रही थी की बबली अब मुझसे भी नाराज होगी आखिर मेरी वजह से भी तो उसे डांट पड़ी।

पर ये क्या;  “वो मेरे लिए नहीं रो रही वो तो इस लिए रो रही थी की उनकी Social Respect कम हो जायेगी मेरे फ़ैल होने से” ये बबली के शब्द थे |

मैं कभी भी मम्मी से नाराज नहीं हुई। कभी मैंने उन पर कोई सवाल नहीं उठाया ना उनके रहते ना बाद। चाहे गुस्से में वो पुरे दिन मुझसे बात भी न की हो जब खेल खेल में मैंने अपनी बहन सीमा का सर फोड़ दिया; या जब मौसी की इकलौती फ़ोटो (जो माँ के पास थी) पे सिंदूर गिरा के ख़राब कर दिया…। तब भी नहीं जब प्यार से बेटा कह के मुझे मेरी नई चीजे मेरे भाई-बहन को देने कह देती।

“बेटा तुम तो समझदार हो ना इसी लिए तुमसे कहते हैं।”

आश्चर्य होता है जब मेरे दोस्त अपनी माँ की शिकायतें करते हैं। जीन्स पहनना पसंद नहीं, conservative है, छोटी को अधिक मानती है क्योंकि वो तेज है।

और उसी वक़्त मैं खुद पर ही हँस देती हूँ, उनके पास हैं तो वो लड़ लेते है लड़ने का अधिकार भी तो है…

तो बस बबली को समझाया “माँ और पढाई की महिमा” और हमलोग ट्यूशन पहुंचे। फिर हर रोज ट्यूशन के बाद हमलोग ग्रुप स्टडीज करते। आंटी मुझे और अधिक मानने लगी। फिर बोड के exams थे तो एकदिन बबली ही कह रही थी “मुम्मी ने स्टोन का ऑपरेशन नहीं कराया, मेरे exams के कारण और आजकल छोटी बहन ही खाना बनाती है ताकि मैं अधिक पढ़ सकु।”

तो लो जी हो गई ना हैप्पी इंडीज। माँ कोई social status की भूखी नहीं और बहन भी चुगलखोर कॉम्पिटिटर नहीं। ये तो टीवी सीरियल्स में होता है। ये रिश्ते ही तो है असल जिंदगी में जिनसे हम जानी-दुश्मन की तरह लड़ भी सकते हैं और प्यार; वो शायद आपको ना भी दिखे पर अंदर बहुत मीठा और मिलावट रहित, नारियल पानी सा।

 

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