क्या वास्तव में पुरुष पेड़ और स्त्री लता है

स्त्री में शासन करने की क्षमता शायद जन्मजात ही होती है। इसलिए एक कम पढीलिखी स्त्री भी अपने पति के उच्च पद से खौफ नहीं खाती। उसके प्रतिभा से कुंठित नहीं होती है,हीनभावना से ग्रसित नहीं होती।

वहीँ पुरुष—-जहाँ अपने से आगे बढती स्त्री को को देखा ,अपने रंग दिखाने लगे। दरअसल ये उनकी कुंठा और शासन करने की अक्षमता ही होती है। उनको लगता है की शायद….

अक्सर उदाहरण में पुरुष को पेड़ और स्त्री को लता बताया जाता है।। लेकिन हकीकत में होता उल्टा ही है। पुरुष को ही तमाम उम्र एक पेड़  एक आधार,एक स्तम्भ की जरुरत रहती है। उनको अगर स्त्री रुपी जमूरा न मिले तो बाजीगरी दिखायेंगे कैसे?

डराकर,धमकाकर,बहला फुसलाकर वो समझते हैं की हमने स्त्री को वश में किया। लेकिन हम औरतें भी तो अभिनय की पराकाष्ठा जानती हैं ना। डरकर,बहलकर ऐसा दिखाते हैं,जैसे सच ही हो। लेकिन क्या सच ही?इस खेल की यही रणनीति है।

जो ये जान लेती हैं,इस गुण में पारंगत हो जाती हैं उनका जीवन आसान हो जाता है।

 

 

 

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