सच्चाई को स्वीकारना- हिम्मत का काम

     कुछ दिन पहले टीवी पर एक प्रोग्राम आता था,सच से सामना। कई तरह के प्रश्न होते थे,लेकिन अंतिम कुछ प्रश्न एकदम निजि,और अधिकांशतः sexual सम्बन्ध से जुडी हुई। अलग अलग लोगों ने अपनी राय दी,ज्यादातर नकारात्मक। लेकिन हम सोचते हैं ये सचमुच हिम्मत का काम है-सच्चाई को स्वीकारना। कुछ लोगों ने कहा इससे समाज पर असर होगा।

घटना तो घट चुकी न। अब उससे related होना है। मतलब-अगर समाज के मापदंड से कोई रिश्ता कोई जिस्मानी तालुक्कात गलत है तो,वो तो कर ही लिए ना। उससे परहेज नहीं है-सिर्फ लोग न जन ले इससे परहेज है।

पति पत्नी के रिश्ते में भी -शायद पत्नी तो जानती ही रहती है, हो सकता है पति की संकुचित मानसिकता को देखते हुए अपने पुराने या नए अफेयर्स छुपा जाती हो-लेकिन जब वो बात किसी मंच पर उजागर होगा तो बात बिगड़ेगी,रिश्ते बिगड़ेंगे। इसलिए नहीं की अचानक मेरा साथी मुझे चरित्रहीन लगने लगा-वो तो मुझे पता ही था,या शक था,या भ्रम था। सिर्फ इस लिए बुरा लगेगा-लोग जान जायेंगे कि इस आदमी की बीवी ने या पति ने इसके अलावा ऐसे ऐसे सम्बन्ध बनाये और ये अभी तक उससे जुड़ा हुआ है।

बहुत सारी बातें ऐसी होती हैं जिंदगी में जिनका की अंत हमें पता होता है। दोस्तों की पार्टी में बच्चा गया था तो शायद शराब लिया होगा। या फलां को फलां से प्यार था तो शायद physical relation हुए होंगे। उन सब को रोकने की हमारी कोशिश नहीं होती है-याने कि अपने को उतना बुरा या लज्जाजनक नहीं लगता है,लकिन लोग न जन जाएँ। इसको हम गर्व से अपने भारतीय संस्कार कहते हैं। ठीक है ,बहुत सारी बातें परदे में रहें तो बेहतर है,लेकिन अगर कोई जन dare करता है-अपना सच उजागर करने के लिए चाहे बदले में पैसे ही मिलते हों तो-बड़ी बात है। ये फिर वही बात हुई की मेरे जीवन में प्राथमिकता किसकी है-

पैसा
परिवार
।या समाज में मुंह दिखाना ।

बहुत सारे क्षेत्र में लोग पैसे के लिए नीचे गिरते हैं,लोभग्रसित होते हैं,बहुत छोटी छोटी प्राप्तियों के लिए-
फिर ये तो सच स्वीकारना है।

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